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Tuesday, 16 April 2013

hanumant Aradhana


Sankat mochak Hanuman ji ki Aradhana
मंगल ग्रह के अशुभ होने के कारण , भाई को हो रहे कष्टों के निवारण हेतु , रक्त सम्बन्धी रोगों से बचाव के लिए ,क़र्ज़ से मुक्ति के लिए , भाई  की सफलता हेतु , ज़मीन जायदाद में उन्नाति के लिए अग्नि व् विधुत सम्बन्धी कार्यो और प्रशासनिक सर्विस में सफलता पाने के लिए हनुमान जी की आराधना करना ही एकमात्र उपाय हैं . भाई की सफलता हेतु प्रातः हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष पूजा सामग्री का प्रयोग करते हुए निम्न मन्त्र का जाप १०८ बार करना चाहिए –
ॐ नमो भगवते अन्जनायाय  महाबालाय स्वाहा का एक माला जाप करे .
इसी प्रकार क़र्ज़ मुक्ति हेतु  मंगल स्तोत्रम् का प्रातः पाठ करना चाहिए –
मंगलो भूमिपुत्रस्च ऋणहर्तां  धनप्रदः
   स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मां विरोधकः
                                                             लोहितो  लोहिताक्षश्चा सामगानां कृपाकरः
                                                             धरात्म्जः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनंदनः
अन्गारको यमास्चैव सर्वरोगप्रहारकः
 वृष्टे कर्ताअपहर्ता च सर्वकामफलप्रद:
             एतानि कुजनामानि नित्यं यः श्रद्धया पठेत                    ॠणं न जयते तस्य धनं शीघ॒मवापनुयात
                   धरणींगर्भसंभूतं विदुत्कान्ति सम्प्रभम
कुमारम शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम
स्त्रोतमंगार कस्यैतत पठनीयं सदानृिभ
                    न तेषां भौमजा पीड़ा स्वल्पपि भवति क्वचित
अंगारक महाभाग भगवत भक्त वत्सल
तवं नमामि ममाशेषमृणमांशु विनाशप .
                          ॠणरोगादिदारिद॒म  ये चान्ये हृद्याम्रत्यवः
                          भय्क्लेश्मस्तापा नस्यन्तु मम सर्वदा
अतिव्रक दुरारोग्य  भोग्मुक्ताजितातामं
तुष्ठो ददामि सामार्ज्यं रुष्टो हरषि तत्क्षणात
                            विरिन्चय्शक्र विष्णुनां मनुष्याणां तु का कथा
                           तेत त्वं सर्वसत्वेन गृहराजो महाबलाः
पुत्रात देहिं धनं देहि  त्वामास्मि शरणं गतः
ॠणदारिद॒ दुखें शत्रुणां चं भयाततः
                          एभि द्वार्दशाभिः स्लोकैर्यः स्तोतिच धरासुतम
महतीं श्रियमाप्नोति ह्य्परो धनदो युवा

इसके अलावा  मन्त्र
ॐ नमो भगवतो आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा  का १०८ बार जाप करना भी लाभ देता है .

Monday, 15 April 2013

Fort of jhansi

Original photograph of rani laxmibai
झाँसी की रानी— सुभद्रा कुमारी चौहान

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
rani jhansi 1857

ASTROLOGER AMRENDRA GAUR AT JHANSI FORT DECEMBER 2012
Jhansi fort is situated between Pahuj and Vetravati ( Betwa) river in Bundelkhand region of Uttar Pradesh , India . Raja Beer Singh Judev of Orchcha got construted Jhansi fort and around it established city of Balwant nagar later on known as Jhansi .



 PANCH MAHAL OF JHANSI FORT
 PLACE WHERE JHANSI RANI JUMPED TO VALLY WITH HORSE 
 kADAK BIJLI CANON

 JHANSI FORT WITH SHURYA
 ASHI AT JHANSI FORT

 JHANSI FORT GARDEN







 JHANSI FORT PARK
FORT BURJ 
STATUE OF JHANSI RANI AT LAXMIBAI PARK 
 VIEW OF JHANSI FORT FROM VRINDAVAN LAL PARK JHANSI
 STATUE OF RANI AT JHANSI
 JHANSI KA KILA   JHANSI राजा छत्रसाल ने मराठो को बाद में झाँसी का राज्य दे दिया था . नरो शंकर यहाँ के पहले पेशवा बाजी राव के गवर्नर थे . इन्होने किले में शंकर गढ़ बनाया था . रानी झाँसी की शादी रजा गंगाधर राव के साथ हुए थी . जो जल्दी ही मर गए थे . इनके कोई संतान न थी इसलिए दामोदर राव को गोद लिया था . लेकिन लार्ड डलहोजी की डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स के अनुसार झाँसी ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन हो गया था . झाँसी रानी ने अपनी झाँसी की  रक्षा के लिए मरते दम तक संगर्ष कर भारत के आज़ादी के पन्नो में सदा सदा के लिए अमर हो गयी .हर साल १८ जून को इनका बलिदान दिवस झाँसी में मनाया जाता है, 

chandra dev ki pooja vidhi


चन्द्र देव की पूजा विधि
सोमवार भगवान चन्द्रदेव का दिन होता है .इसदिन  चन्द्र ग्रह की प्रसन्नता के लिए सोमवार का व्रत रहना चाहिए .जिससे ब्लड प्रेशर , एनीमिया , रक्त विकार , पागलपन , मतिभ्रम , जुकाम , कफ़ , गले के रोग व् हार्ट रिलेटेड रोग नहीं होते हैं .
विधि  -- इस व्रत को करने के लिए सुबह स्नान करके सोमवार की कथा करें . इसके अलावा मंत्र – ॐ सों सोमाय नमः   का जाप १०८ बार करना चाहिए . इस दिन भगवन शिव की आराधना करनी चाहये .शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में माँ के स्वास्थ्य रक्षा के लिए शिवलिंग में दूध से अभिषेक करना चाहिए .इस दिन ॐ शिवाय नमः का जाप या महामृतुन्जय के जाप से माता का भला होता है. मानसिक तनाव से बचने के लिए सोमवार का व्रत और शिव पूजा लाभकारी होती है . पलाश का फूल व् सफ़ेद फूल से पूजा करनी चाहिए . इस दिन खीर व् मीठा दही खान चाहिए . सुबह जल में सफ़ेद फूल डालकर नहाना चाहिए.
दान –इस दिन प्रातः काल में चावल , कपूर , चांदी , मोती , दही , मिश्री , सफ़ेद कपडा , शंख , स्वेत चन्दन , सफ़ेद बैल , सिंघाड़ा का आटा और फलो का दान करना चाहिए .
मंत्र –   ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः का १०८ बार जाप करना चाहिए . कुल मिलाकर ४४०००० बार जाप होना चाहिए .
इस दिन खिन्नी की जड़ को सफ़ेद धागे में बाएं भुजा में बांधना चाहिए .


Sunday, 14 April 2013

How to pray Lord Sun


भगवान् भास्कर की आराधना
सूर्यदेव जगत के संचालक है . इन्ही की किरणों में छुपी उर्जा को हरी पत्तियाँ लेकर भोजन को बनती है. जिसके द्वारा हमें जीवन जीने के लिए उर्जा प्राप्त होती है .भगवान भास्कर हमारी आत्मा और शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं .जब सूर्य हमारी कुंडली में कमजोर हो जाते है तो हमारी अस्थियो , शरीर , नेत्रों , आत्मबल और हमारे धन सम्पदा को कमजोर करते है .इसकी शांति हेतु उपाय इस प्रकार हैं ---व्रत  ===  रविवार के दिन सूर्य देव की आराधना व्रत के माध्यम से करनी चाहिए .इसके लिए प्रातः स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल गुडहल के फूल के साथ देना चाहिए .आदित्य हृदयस्रोत का पाठ या रविवार की कथा पढ़नी चाहये .शाम को बिना नमक का बिना तला भोजन करना चाहिए .
----दान – रविवार के दिन गेहूं , सुनहरे वस्त्र ,गुड़ , ताम्बा , सोना , घी , लाल कपडा ,लाल फूल , केसर , मूंग , लाल चन्दन नारियल , गुलाब का फूल और लाल गाय का दान करना चाहिए .
--- रत्न---इस दिन माणिक्य को अनामिका में तांबे या गोल्ड में पहनना चाहिए . पहनने के पहले मंत्र ओम मित्राय नमः का १०८ बार जाप करना चाहिए .
---पाठ -  इस दिन हरिवंश पुराण का पाठ करना लाभप्रद रहता है .
      बेल की जड़ को गुलाबी धागे में बायीं भुजा में पहनने से लाभ मिलता है .
---मंत्र == सूर्य देव की उपासना हेतु इनमे से कोई भी एक मन्त्र जाप १०८ बार कर सकते है.—
१.        ॐ सूयार्य नमः
२.      ॐ घृिण सूर्याय नमः
३.      ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
इनको जाप करने से स्किन व् नेत्र रोग दूर होते हैं .पदोनती हो जाती है .






Saturday, 13 April 2013

My article 0n Jaliyanwala bagh , Amritsar

This is my first article published on  navbharat paper , Bhopal
 Activites 2011

 photography award
 Faculty development program 2013
Fort OF Jhansi
 Kadak bijli top of rani laxmi bai
 Jhansi
 Jhansi Fort

Shani kaise shant ho


 शनि शांत कैसे हो
शनि की साढ़े साती और ढ़ैया जब जातक पर चलती है तब जातक अनगिनत मुसीबतों से घिर जाता है . इसी प्रकार जब जातक की कुंडली में शनि अशुभ होता है तब जातक को उसके कुप्रभाव से बचने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए .
व्रत – प्रात : स्नान करके एक कलश में गंगाजल भर दे फिर उसे शिव जी को अर्पित करे . शाम को शनि मंदिर जाकर काले या नीले फूल  व् तेल को  शनि भगवान को अर्पित करें .या पीपल के नीचे सरसों का दिया जलाये .
मंत्र – इस दिन बीज मंत्र –
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनीस्चाराये नमः का १०८ जप करना चाहिए .
दान – काले फूल ,काला वस्त्र , नारियल , जूते, सरसों का तेल ,कम्बल , शनि चालीसा ,कोयला , केसर , कस्तूरी ,  काली उर्द , गरीबो को भोजन और  काली गाय आदि का शनिवार को दान करना चाहये . दान को मध्यान्ह काल में शनिवार को करना चाहिए .
रत्न – शनिवार के दिन मध्यमा अंगुली में कटेला / नीली / नीलम / लोहे का रिंग पुराणी नाव की तली का या घोड़े की नाल का पहनना चाहिए . पहनने के पहले मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः का १०८ जाप करना चाहये .
इसके अलावा अपनी लम्बाई के बराबर का काला धागा पीपल के पेड़ पर ७ बार बांधे .
शनिवार के दिन बिच्छु की जड़ को बाएं भुजा में बांधे .
सुंदर कांड  व् हनुमान चालीसा का पाठ भी करना चाहिए .


Friday, 12 April 2013

shukra shanti ke upay


शुक्र की शान्ति के उपाय
जिस जातक का विवाह देर से हो रहा हो . जो नपुंसकता  व् वीर्य विकार से परेशान हो . स्किन में खुजली और अंगूठे में दर्द रहता हो . जिसके वाहन और कपड़ो में बार – बार ख़राब होने की दिक्कत हो तो उसका शुक्र अशुभ होता है . जिस कुंडली में रेका योग बनता हो . शुक्र त्रिक में हो तो उसे निम्न उपाय करने चाहिए .
व्रत – प्रातः स्नान करके कलश में जल भरकर पूजा घर में रखे .कलश के ऊपर शुक्र  की मूर्ति रखे . फिर सफ़ेद फूल , अक्षत , धूप , स्फटिक ,और सफ़ेद मोती रख कर पूजा करे . इस दिन संतोषी माता या लक्ष्मी जी का व्रत करे . खीर खाए और खट्टी वस्तु का प्रयोग न करें .
मंत्र जाप – इस दिन मंत्र – ‘ ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः का १०८ बार जाप करे .
दान – इस दिन चाँदी , चावल , खीर , दही , दूध , चीनी , सफ़ेद चन्दन , इत्र , मिश्री , सफेद फूल और सफ़ेद वस्त्रो का दान सूर्योदय के समय करना चाहिए .
पाठ – इस दिन लक्ष्मी सूक्त और शुक्र कवच का पाठ करना चाहिए .
रत्न – इस दिन शुक्ल पक्ष में गंगाजल और दूध- हल्दी में डायमंड / अमेरिकन डायमंड / ज़रकन / ओपल / फिरोजा को चाँदी में मध्यमा अंगुली में पहनना चाहिए .
  इसके अलावा रोज़ गाय को एक रोटी खिलाये , तुलसी के नीचे घी का दिया जलाये , हर शुक्रवार को पानी में शीशा डालकर स्नान करे , स्त्री को सम्मान से देखे सर्पोखा की जड़ को सफ़ेद धागे में डालकर पहने .स्फटिक , कमलगट्टा. या मोती की माला को भी पहन सकते हैं .